जलीकट्टू

जलीकट्टू आस्कर जीत पाएगी ???
मलयालम फ़िल्म जलीकट्टू को आधिकारिक घोषणा हो चुकी है ऑस्कर में भेजने के लिए…

केरल की मलयालम भाषी फ़िल्म है,
हर साल हम एक फ़िल्म ऑस्कर में भेजते है केटेगरी होती है सर्वश्रेष्ठ अंतराष्ट्रीय विदेशी भाषीय फ़िल्म
भारत मे कूल 26 फिल्में कतार में थी जिसमे सिरियस मेन, छपाक, शकुंतला देवी, गुंजन सक्सेना, बुलबुल,
लेकिन अंतिम चयन हुवा जलीकट्टू का,
जो कि 93वे एकेडमी ऑस्कर अवार्ड्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी
हर साल यह फरवरी में होता है लेकिन करोना के चलते इसे अप्रैल तक स्थगित किया गया है,
चुकी जलीकट्टू 2019 में प्रदर्शित हुई थी लेकिन 2020 में गलीबॉय को भेजा गया था
ऑस्कर के नियमो में एक साल पुरानी तक फ़िल्म जिसमे सम्वाद अंग्रेजी में ज्यादा न हो,
फ़िल्म केवल मलयालम भाषा मे एमेजॉन पर उपलब्ध है सब टाइटल ज़रूर अंग्रेजी हिंदी में उपलब्ध है,

फ़िल्म पर आते है
केरल के एक गाँव मे एक भैंसा सहकी हो चला है जिसे गाँववाले वध करना चाहते है लेकिन अंत मे आपको समझ पड़ेगी की जानवर भैंसा सनकी नही हुआ था इंसान रूपी जानवर सनकी हुवा था यही फ़िल्म का मूल सन्देश है जो कि ऑस्कर की दौड़ में फ़िल्म को खड़ा करता है,
फ़िल्म को देखने शुरू करते है तो खुद को और फ़िल्म को रोक नही सकते है,
संगीत शानदार है प्रशांत पिल्लई नेहर दृश्य पर संगीत माकूल और लाजवाब बनाया है,,
सहयोगी कलाकारों ने किरदारों के साथ कुछ ऐसा न्याय किया है कि वही फ़िल्म के असली नायक लगने लगते है,
फिल्मांकन
लंबे लंबे दृष्य एक ही टेक में निकाल दिए गए है जो कि गिरीश गंगाधरन का जादू ही कहा जाएगा, फ़िल्म देखते समय हमें ऐसा आभास होने लगता है कि किसी घटना का सीधा चित्रण चल रहा है तो यह कैमरामैन की कामयाबी मानी जाएगी, भीड़ भाड़ वाले दृश्यों की सटीकता भी दिल तक पहुच जाती है, एक दृश्य में कुछ गाँव वाले टॉर्च हाथ मे लिए शिकार कर रहे पूरा देखना एक तो एक नया अनुभव देता है, क्योकि यह दृश्य मुश्किल और कठिन है,

कलाकारों में सभी ने दिल जीत लिया है, खास तौर पर शांति, अंटोनी, सबुमोंन, जाफर शानदार लगे
सँवाद और कहानी एस हरीश ने इतने सुंदर बुने है कि आप कोई भी दृश्य छोड़ना नही चाहेगे
एल जे पेलिसरी का निर्देशन भी उम्दा है
जो फ़िल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाता है
अंत मे फ़िल्म में अवार्ड जितने की सारी खूबियां है लेकिन अभी अंतराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा भी समझना पड़ेगी
फिर भी फ़िल्म के सभी तकनीकी पहलू जैसे फिल्मांकन, कलाकार, मूल परिकल्पना, संगीत, निर्देशन और सामाजिक सन्देश सभी मे फ़िल्म उम्दा और शानदार है ,,
फ़िल्म आस्कर लाने की सभी खूबियां रखती है,
एक टीस सी है मन मे
कि भारतीय फिल्मों के हाथों में आस्कर ज्यादा नही पहुच पाया तो क्या हम अंतराष्ट्रीय सिनेमा में प्रतिस्पर्धा नही कर पाए या खुद को साबित नहि कर पाए है,
परन्तु इस बार यह अकाल जलीकट्टू पर खत्म होता दिख रहा है,

फ़िल्म समीक्षक

इदरीस खत्री

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