कृषि सिंचाई योजना की समग्र योजना के साथ एकीकरण होना चाहिये : प्रधानमंत्री

किसानों को लाभ पहुंचाने के लक्ष्‍य की दिशा में एक और पहल करते हुए, प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार के सम्‍बद्ध विभागों और मंत्रालयों से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में तेजी लाने को कहा है। आज की बैठक केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा कल लिए गए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में संशोधन को मंजूरी देने संबंधी फैसले के बाद हुई। इन संशोधनों में केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने हेतु अक्सर इस्‍तेमाल होने वाले 13 कानूनों को भूमि अधिग्रहण कानून के दायरे में लाने का किसान हितैषी कदम उठाया जाना शामिल है। इस प्रकार बड़ी संख्‍या में ऐसे किसानों को लाभान्वित किया गया है, जिनकी जमीन की ऐसी परियोजनाओं के लिए जरूरत है।

इस उच्‍च स्‍तरीय बैठक में कृषि मंत्री, जल संसाधन मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री भी उपस्थित थे। इस बैठक में प्रधानमंत्री ने, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्‍यम से हरेक खेत के लिए सिंचाई की व्‍यवस्‍था करने के अंतिम लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए बहुआयामी नीति अपनाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से सिंचाई संबंधी परिसम्‍पत्तियों की रचना और वृद्धि के लिए नरेगा का इस्‍तेमाल होता आया है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की समग्र योजना के साथ नरेगा का एकीकरण किया जाना चाहिये।

वृहद स्‍तर पर, प्रधानमंत्री ने जल संसाधन मंत्रालय से नदी को जोड़ने वाली परियोजनाओं की पहचान करने को कहा, जिन्‍हें तत्‍काल शुरू किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने देश भर के जल स्रोतों की पहचान और उनका व्‍यापक मानचित्रण करने का आह्वान किया है। उन्‍होंने कहा कि ग्रामीणों को सिंचाई के उत्‍कृष्‍ट संभव स्रोतों के बारे में मार्गदर्शन करने के लिए उपग्रह चित्र एवं 3डी फोटोग्राफी का इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने सम्‍बद्ध विभागों से प्रगतिशील किसानों को पहचान करने की सम्‍भावनाएं तलाशने को कहा, जो जल संरक्षण एवं सिंचाई की नवीन तकनीकों को कार्यान्वित करने की दिशा में पहल कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने नजदीकी ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए प्रमुख कस्‍बों और शहरों की जल पुनर्चक्रण परियोजनाओं के एकीकरण का भी आह्वान किया। उन्‍होंने जल संरक्षण के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने के महत्‍व पर भी बल दिया। इस अवसर पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह भी उपस्थित थे।

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