पत्रकारों की शारीरिक और आर्थिक सुरक्षा जरूरी – सिन्हा

(आई.डी.एस.) इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री एस. एन. सिन्हा ने कहा कि सरकार पत्रकारों के सुरक्षा कानून के तहत शारीरिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करें। सुरक्षा कानून लागू कराने के लिए हमें एकजुट होकर मुहिम चलाना होगी, क्योंकि पत्रकारों की सुरक्षा से देश को प्रजातंत्र बचा पाएगा। अपने लिऐ ही पत्रकारों को आवाज उठाना होगी।

श्री सिन्हा आज शाम प्रीतमलाल दुआ सभागृह में स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश द्वारा ‘जनतंत्र में पत्रकार सुरक्षा’ विषय पर आयोजित परिसंवाद में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इण्डियन प्रेस कौंसिल के सदस्य श्री के. अमरनाथ ने की। विशेष अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री वाय. नरेन्द्र रेड्डी थे। श्री सिन्हा ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा हेतु डेढ़ वर्ष पूर्व इन्दौर से पोस्ट कार्ड मुहिम चलाई जा रही है। पत्रकार सुरक्षा कानू की पूरे विश्व में चर्चा हो रही है। दुर्भाग्य है कि सरकार का रूख इसके ठीक विपरीत है। पत्रकारों पर हमला होता है तो हम अंतर्राष्ट्रीय मंच तक प्रकरण ले जाते है। इंडियन प्रेेस कौंसिल ने भी पत्रकार सुरक्षा समिति गठित की है। कौंसिल ने भी केन्द्र सरकार को सुरक्षा कानून बनाने की सिफारिश की है। यदि किसी पत्रकार पर हमला होता है तो हमारा भी दायित्व है कि हमला पत्रकारिता के कारण हुआ है या अन्य कारण से। इसके अलावा हमें यह भी देखना होगा कि वह असल में पत्रकार भी है या नही। श्री सिन्हा ने कहा कि पहले इंडियन प्रेस कौंसिल में प्रकरण आने पर अधिक समय लगता था, किन्तु अब प्रकरण प्राप्त होते ही तत्काल जाॅच शुरू हो जाती है। पत्रकार देश का प्रमुख अंग है क्योंकि वह स्वयं के लिए नहीं, देश के लिए काम कर रहा है। जब महाराष्ट्र में पत्रकारों की सुरक्षा हेतु कानून है तो अन्य राज्यों में कानून क्यों नही बनाया जा रहा है।

विशेष अतिथि श्री नरेन्द्र रेड्डी ने कहा कि पत्रकारों पर पूरे देश में हमले हो रहे है। यह गंभीर समस्या है। सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। हम कई वर्षो से सुरक्षा कानून की मांग को लेकर लड़ रहे है इसके लिए हमें एकजुट होना ही पड़ेगा। अध्यक्षता करते हुए श्री के. अमरनाथ ने कहा कि प्रेस कौंसिल द्वारा गठित सुरक्षा समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए सरकार से सुरक्षा कानून बनाने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि कौंसिल के पास अब भी 65 प्रतिशत प्रकरण विचाराधीन है। सरकार पत्रकारों की सुरक्षा हेतू कानून बनाने के लिए गंभीर नहीं है। उसका कहना है कि वर्तमान कानून पर्याप्त है। प्रारंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया विजय अड़ीचवाल, आकाश चौकसे, शीतल राय, अजय भट्ट, नीलेश जैन, अभिषेक बड़जात्या ने अतिथियों का स्वागत किया। स्मृति चिन्ह सुरेंद्र बंसल, डॉ. रजनी भंडारी और अतुल पाठक ने भेंट किये। कार्यक्रम का संचालन स्टेट प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल ने किया।

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