रिश्ते

रिश्ते, जो तैयार होते हैं, संबोधन की नींव से, सामीप्य की दीवारों से । हर साथ बिताया पल, एक उस ईंट की तरह, जो इमारत की बुनियाद बनती है ।…

दुआ

हर लम्हा ज़िंदगी का एक कोरा सफहा है, कूची ख्वाहिशों की लेकर तुम इसमें रंग भर लो । लेकर सुबह से सिंदूरी लाल, आकृति नये जीवन की बनाना । फिर…

आज फिर सहर एक शाम लाई है

ये कैसी सहर हुई है आज, कि हर ओर सांझ नज़र आती है, तन्हा गलियों में पसरी सी पगलाई ये सियाही नज़र आती है. कल रात सोचा था रोशनी का…

सन्देश प्रकृति का

तुम्हारी जिज्ञासा और मेरा कौतूहल एक दिन पहुँचे क्षितिज के पास, अठखेलियाँ करती परियाँ जहाँ सतरंगे इन्द्रधनुष के साथ. पुण्य आत्माएँ बसती वहाँ शुभ्र बादलों के साथ . सभी ग्रहों…

क़दम मिला कर चलना होगा

बाधाएँ आती हैं आएँ घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा।…

क्या खोया क्या पाया जग में

क्या खोया क्या पाया जग में, मिलते और बिछड़ते मग में, मुझे किसी से नहीं शिकायत, यधपि छला गया पग-पग में, एक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें,…

दीपावली है दीपों का त्यौहार

दीपावली, दीपों का त्यौहार , लाता खुशियाँ ढेर अपार , आता साल में एक ही बार , लगता है ये सबको प्यारा, रोशनी से भरता गगन को , बच्चे लड़ी,…

तुम्हारे इंतज़ार में…

मैंने कितने ही ख़त लिखे तुम्हें बुलाने के लिए मगर तुम न आए तुम्हारे इंतज़ार से ही मेरी सहर की इब्तिदा होती दोपहर ढलती और फिर शाम की लाली की…

माना हमारे ख़्वाब की ताबीर तुम नहीं

होठों पे नरम धूप सजाते रहे हैं हम आंखों में जुगनुओं को छुपाते रहे हैं हम माना हमारे ख़्वाब की ताबीर तुम नहीं पलकों पे इनको फिर भी सजाते रहे…

तुम्हारे ख़त मुझे बहुत अच्छे लगते हैं…

तुम्हारे ख़त मुझे बहुत अच्छे लगते हैं क्यूंकि तुम्हारी तहरीर का हर इक लफ्ज़ डूबा होता है जज़्बात के समंदर में और मैं जज़्बात की इस खुनक (ठंडक ) को…