लौट कर आयूंगा कूच से क्यों डरूं

“अतुल गौड”
लेखक प्रिंट एवं एलेक्ट्रोनिक मिडिया के वरिष्ट पत्रकार हैं

अटल थे तो कहाँ जायेंगे यहीं तो है आप उन्हें जहाँ पाएंगे अटल जी जैसी शक्शियतें कभी मरा नहीं करती ये बात और है की मौत से उनकी ठनी थी एवो प्रकर्ति का नियम है उसे हर हाल में सूरते अंजाम होना ही था हुआ भी वही जो होना था रार नहीं ठानने और हार नहीं मानने के लिए जाने जाने वाले अटल जी तो काल के कपाल पर लिखते मिटाते गीत नए गाते रहने वाले दिलखुश मिजाज थे वो कल थे आज थे प्रेरणा थे समर्पण थे ह्रदय स्पर्शी थे अटल जी की मौत से माना ठनी थी पर कहीं ज्यादा जिन्दगी से उनकी बनी थी एवो कवि थे नेता थे दिलों में राज करते थे वक्ता ऐसे की मनो रस्सी से श्रोता को बांध दे बात कह देने की कला ऐसी की किसी को पानी पानी कर दे नेतृतव ऐसा की सबको झुकने पर मजबूर कर दे कोई एक विधा नहीं थी उनकी खासियत हर विधा में वो बहुत ख़ास थे अटल ने गुलाम भारत भी देखा अंग्रेजों का असहयोग भी किया गांधी के अनुयायी भी अटल थे हर परस्थिति में डटे थे वो पत्रकार थे तब भी अडिग निर्भीक और अटल ही थे वो नेता थे यकीनन बेबाक और दो टूक थे ये वही थे अटल थे प्रधान मंत्री थे तो भी अटल थे परमाणु भी अटल थे तो कारगिल में भी वो अटल थे आज जो देश ग़मगीन है यूँही नहीं रोता कोई ये वही अटल है जो दिलों में बसे हैं संसद में शेर की तरह दहाड़ने वाले इस अटल का समूचा विपक्ष कायल था खुद नेहरु ने तो उनके उज्वल भविष्य की जैसे कामना की थी प्रधान मंत्री बनने की खुली दुआ दी थी इस शेर ने ज़िदगी से हर रोज़ दो हाथ भी अटलता से किये और मौत से बखूबी ठान कर अटल शान से जिए थे और देखिये इसी अटल की मौत का वाकया जरा करीब से क्योंकि अटल के सिवा किसी दुसरे को ऐसी मौत भी नसीब नहीं होती याद है न उन्ही ने कहा था की मै जी भर जिया और मै मन से मरुँ एए तो देखिये कुदरत भी जैसे उनके आधीन थी या यूँ कहूँ की वो भी अटल की कायल थी स जिस बीजेपी को शीर्ष पर लाने के लिए वो जी जान से जुटे थे आज देखो न वही बीजेपी सिरमौर है आधे से ज्यादा प्रदेशों सहित केंद्र में उस ही की सरकार है देश का शीर्ष पद भी उसी के पास है यही अटल जी की आस थी यही मन से मरने की उनकी बात थी एक ऐसा नेता ऐसा व्यक्तित्व जिसके उल्लेख में शब्दों का टोटा है न जाने कितने हैं जो मन ही मन रोते हैं कुछ तो वो भी हैं जो पहले चल कर उनके आ जाने की बाट भी जोहते हैं बहुत कम लोग जानते होंगे इसलिए यहाँ बता दूँ की मशहूर गीत कार नीरज जी और अटल जी एक अभिन्न मित्र थे दोनों एक साथ पड़े थे तो दोनों कवी थे नीरज जी ज्योतिष के भी जानकार थे और उनका कयास था की हमारी मौत के बीच ज्यादा फासला नहीं होगा नीरज ने कहा था की आगे मै रहूँगा तो सिर्फ 30 दिनों में ही अटल तू भी मेरे करीब होगा और देखिये कुदरत का अजूबा की २९ वे दिन अटल ने दुनिया को अलविदा कहकर नीरज से मुलाकात कर ली कोई एक नयी कविता जरूर होगी जो इन दोनों ने फिर नयी रच ली होगी अटल जी सर्व धर्म संभाव के पक्षधर थे गंगा जमुना संस्कृति के पथ पदर्शक थे तारीख गवाह रहेगी की भारत की प्रगति के लिए पल पल हर पल जीने वाले अटल जी १५ अगस्त को तिरंगे को फैरते देख सलाम कर १६ अगस्त को दुनिया छोड़ चले गवाह रहेंगे ये देश दुनिया वाले जो उनकी राह में फूलों की बरसात करते रहे गवाह रहेंगे ये सूरज चाँद सितारे जिहोने अटल को सबसे करीब से देखा है ये वही तो है जिनकी मौजूदगी में अटल ने प्रभु ये दुआ मांगी और कहा की हे प्रभु मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना गैरों को गले न लगा सकूँ इतनी रुखाई कभी मत देना स देखो ये अटल ही हैं और यह अटल यात्रा है इसमें अटल का दर्द है एकता का मन्त्र है की बट गए शहीद गीत कट गए कलेजे में कतार दड गयी दूध में दरार पड गयी पर मित्रो अटल सन्देश तो सिर्फ यही है की निज हाथों में हस्ते हस्ते आग लगा कर जलना होगा कदम मिला कर चलना होगा एकदम मिला कर चलना होगा एएएसाहित्य जगत को अटल ने जो कुछ दिया अद्भुत दिया और शायद मौत की आखों में झांक कर कविता लिखने वाले वो इकलोते कवी थे उन्होंने अपनी कविता के जरिये बापू से क्षमा मागी तो जय प्रकाश को राजनैतिक विरासत आगे बढाने का भरोसा भी दिया जब सुब कुछ उन्होंने कविता के जरिये ही कहा है जो आज खरा है सिद्ध है तो यकीनन ये भी सत्य होगा की रार नहीं ठानुगा हार नहीं मानुगा काल के कपाल पर लिखता हूँ मिटाता हूँ गीत नए गाता हूँ मैं जी भर जिया एमन से मरुँ लौट कर आऊंगा एकुच से क्यूँ डरूं भले ही मौत से इस बार तुम्हारी ठनी हो अटल जी पर भारत रत्न हो तुम तुम्हे लौट कर फिर आना होगा भारत भी ऋणी है तुम्हारा उसे हर जन्म में तुम्हारा इन्तजार होगा तुम्हारा इन्तजार होगा …….

Related Posts

जब दिल ही टूट गया

मंत्री मंडल बनने से पहले की रात कई “माननीयों” पर भारी रही। जब तक नामों की पोटली नहीं खुली थी, उम्मीद ज़िंदा थी। तब नींद में गुनगुनाया करते थे, “शब-ए-इंतेज़ार”…

भगवान के साथ रोटी

एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर भगवान से मिलने की जिद्द किया करता था। उसकी अभिलाषा थी, कि एक समय की रोटी वह भगवान के साथ खाए… एक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

इंदौर के इतिहास में पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव मैदान छोड़ा

  • By admin
  • April 30, 2024
  • 559 views
इंदौर के इतिहास में पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव मैदान छोड़ा

मध्य प्रदेश में बना दुनिया का सबसे ऊंचा जैन मंदिर

  • By admin
  • April 29, 2024
  • 700 views
मध्य प्रदेश में बना दुनिया का सबसे ऊंचा जैन मंदिर

महाकाल मंदिर में शुल्क देकर भी शीघ्र दर्शन नहीं कर सकेंगे

  • By admin
  • December 27, 2023
  • 661 views
महाकाल मंदिर में शुल्क देकर भी शीघ्र दर्शन नहीं कर सकेंगे

जब दिल ही टूट गया

  • By admin
  • December 27, 2023
  • 687 views

चार वेद, जानिए किस वेद में क्या है….?

  • By admin
  • December 21, 2023
  • 698 views
चार वेद, जानिए किस वेद में क्या है….?

भगवान के साथ रोटी

  • By admin
  • December 21, 2023
  • 811 views
भगवान के साथ रोटी