“जानता हूँ मैं यह सब कि…”

जानता हूँ मैं यह सब कि
है आपको मुझसे बहुत-सी अपेक्षाएँ ….
किन्तु जानते यह नहीं कि
मैं हूँ अकिंचन ….
उलझा हुआ स्वयं अपने ही में
निर्भर हूँ पूर्णतः उस जगत-नियंता पर …,
इस पर-निर्भरता की भूमि पर होकर खड़े
अब बताओ आप स्वयं-ही
क्या दे सकता हूँ मैं आपको ,
सिवा अपनी हार्दिक शुभकामनाओं के ?
आपकी ज़िन्दगी की प्रत्येक सुबह शुभ हो …नवीन कर्म की प्रेरक हो
प्रत्येक दोपहर उपलब्धि-जन्य हो
प्रत्येक शाम सुहानी हो
और
प्रत्येक रात्रि आनंदित करने वाली मधुर हो …

डॉ. सुरेन्द्र यादव, इंदौर ( मध्य-प्रदेश)

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